आखीर वो घर किसका था ?


 रमेश एक गरीब घर से सम्बंध रखता था । उसके पिता एक मिल मे काम किया करते थे और मॉ घर मे कपड़े सिलने का काम किया करती थी उसकी चार बहने थी । रमेश अपनी बहनो से सबसे छोटा था । ज्यादा पैसे ना होने के कारण वो ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पाया और जल्द ही उसे शहर भेजा गया ताकि वो भी कुछ पैसे कमाए और अपनी बहनो कि शादी मे अपने माँ बाप का हाथ बटा सके । ज्यादा पढ़ा लिखा ना होने के कारण इसे भी एक कम्पनी मे एक चपरासी कि नौकरी मिल गई । रमेश बहुत महेनत से काम करने लगा उसके महेनत से खुश होकर कम्पनी के मालिक ने एक दिन रमेश को अपने कैबिन मे बुलाया और कहा कि रमेश अभी तुम बहुत छोटी उम्र के हो तुम्हें अभी अपना ध्यान पड़ने लिखने मे लगाना चाहिए । फिर ऐसी क्या मज़बूरी है जो तुम नौकरी करने आ गए । रमेश ने अपनी घर कि सारी स्तिथी कम्पनी के मालिक को बताई उन्हें ये सब सुनकर उस पर बहुत तरस आया उन्होंने उसे कहा कि आज से तुम मेरी कम्पनी मे भी काम किया करो और अपनी पढ़ाई भी साथ साथ जारी रखो ये सब सुन कर रमेश कि आँखे भर आई ।     

                  आखिर वो दिन भी जल्द हि आ गया जब रमेश अच्छे अंको से पास हो गया उसने अपनी पढ़ाई पूरी की और अब उसी कम्पनी मे वह एक अच्छे ओदे पर काम करने लगा । कम्पनी कि तरफ से अब उसे रहने के लिए एक अच्छा घर और गाड़ी भी मिल गई । और कुछ समय बाद उसने अपनी बहनो कि शादी भी अच्छे घरो मे हो गई । थोड़े समय बाद रमेश के माँ बाप ने उस पर भी शादी करने के लिए जोर लगाना शुरू कर दिया । 

एक दिन रमेश जब ऑफिस के काम से एक दूसरी कम्पनी मे गया तो उसकी मुलाकात उस कम्पनी मे काम करने वाली लड़की प्रिया से हुई । उसे देखते ही रमेश को उसे पहल नज़र का प्यार हो गया । वो एक बहुत हि सीधी साधी और अच्छे परिवार से  संबंध रखने वाली लड़की थी । वो दौनो अक्सर मिलने लगे । और प्रिया को भी रमेश से प्यार हो गया । जल्द हि उन्होंने अपने घर वालोंं कि सारी बात बता दी दोनों के घर वालोंं ने मिल कर उनकी शादी तय कर दी । 

        जल्द ही उनकी शादी हो गई और वो ख़ुशी ख़ुशी रहने लग गए । प्रिया का हमेशा सर एक सपना था कि वो खुद का एक घर ले । पर इसके लिए उन्हे बहुत पैसे कि जरूरत थी । परन्तु उन दोनों कि तन्खा मिला कर भी वो इतने पैसे जमा नहीं कर सकते थे । एक दिन प्रिया कि सहेली ने उसे एक ऐसे आदमी के बारे मे बताया जो इंस्टॉलमेंट पर घर दिया करता था । प्रिया ने रमेश को इस बारे मे बताया परन्तु रमेश को प्रिया का ये  ख्याल कुछ ठीक नहीं लगा । पर प्रिया के बार बार ज़िद करने पर रमेश उस आदमी से मिलने के लिए तैयार हो गया । वो दोनों मिल कर उस आदमी से मिले उसने उन्हें अपनी स्कीम के बारे मे बताया कि आप अपने पैसे मुझे इंस्टॉलमेंट मे दे सकते हैं जब आपके पैसे पूरे हो जाएंगे  उस दिन आपके घर कि चाबी आपके हाथ मे होगी । दोनों ने हर महीने अपनी तन्खा मे से पैसे बचा कर इंस्टॉलमेंट देना शुरू कर दिया वो दोनों अपनी जिन्दगी बहुत तंगी मे बिताने लगे यही सोचकर के कि एक दिन अपना घर होगा । तब वह अपनी जिंदगी आराम से जियेंगे । 

   कुछ सालो बाद आखिर वो दिन आ गया जब उन्हें अपने घर कि चाबी मिलने वाली थी । प्रिया बहुत खुश थी वो अपने नए घर के लिए समान खरीदने के सपने देखने लग गई कौन सी चीज़ कहा होगी । इन्ही सपनो को आँखों मे बसाये हुए वो दोनों उस आदमी से चाबी लेने उसके ऑफिस पहुचे । पर जब वो दोनों उसके ऑफ़िस के बाहर पहुचे तो उन्होंने देखा कि बहुत से लॉगो कि भीड़ वहां खड़ी हुई थी कुछ लोग जोर जोर से चिख रहे थे कुछ रो रहे थे । प्रिया और रमेश उन लोगों के पास गए और उनसे उनके रोने का कारण पुछा तब उन्हें पता चला कि वो आदमी सभी के पैसे लेकर वाह से भाग गया यह सुनते हि प्रिया के आँखों के आगे अँधेरा छा गया जमीन पर गिरने वाली हि होती हैकि रमेश उसे संभाल लेता है वह दोनों कोतवाली जाते है पर वो भी उनकी सहायता करने से इंकार के देते हैवो दोनों टुटे दिल से घर जाते है और खूब रोते है अगले दिन रमेश प्रिया को लेकर उस घर मे जाता है जो उन्होंने खरीदने के सपने देखें थे । वहा जाकर  उन्हें पता लगता है कि वो घर तो पहले से ही किसीने खरीद रखा था । वो ये सारी बातें सहन नहीं कर पाये और उसी घर कि छत से कूद कर उन दोनों ने जान् दे दी ।  उस दिन के रमेश और प्रिया उस घर मे रहने लगे जो सपने उन्होंने उस घर मे जीते जी रहकर देखें थे वो सपने टूट गए पर उनकी आत्मा ने उसी घर मे अपना बसेरा बना लिया उसके बाद उस घर के मालिक ने वह घर चद्द दिया और जो कोई भी उस घर मे रहने के लिए आता तो उन्हें उन दोनों कि आत्मा वहाँ रहने नहीं देती थी । थोड़े समय मे हि उस घर मे भूत होने कि खबर सारे शहर मे आग कि तरह फैल गई  और लोगों ने उस घर कि तरफ आना भो छोड़ दिया । प्रिया और रमेश कि आत्मा वही रहने लग गई । लेकिन कई सालो बाद एक दिन अचानक 

                                                                                                          to be continue

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